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कवर्धा शराब दुकान के बाहर ब्लैक में बिक रही शराब, नई आबकारी नीति पर उठे सवाल ।

Apr 22
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कवर्धा-छत्तीसगढ़ में अप्रैल माह से लागू नई आबकारी नीति के बाद शराब बिक्री व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री शुरू होने और पुरानी कांच की बोतलों का स्टॉक खत्म करने की प्रक्रिया के चलते कई सरकारी दुकानों में शराब की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर कवर्धा की शराब दुकानों में भी देखने को मिल रहा है, जहां शराब प्रेमियों को न तो मनपसंद ब्रांड मिल पा रहे हैं और न ही पूरी मात्रा में शराब उपलब्ध हो रही है।


लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी दुकानों में शराब की कमी बताई जा रही है, तो आखिर दुकान के बाहर खुलेआम ब्लैक में शराब कैसे बिक रही है? 80 की शराब 120-130 रुपये में खुलेआम बिक्री कवर्धा शराब दुकान के सामने कुछ लोग खुलेआम देशी शराब की बोतलें 80 रुपये की जगह 120 से 130 रुपये तक बेचते नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब सरकारी दुकान के सामने हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।


आखिर ब्लैक कारोबारियों को कहां से मिल रही शराब?


जब दुकानों में स्टॉक कम है, तो बाहर बेचने वालों के पास शराब कहां से आ रही है? यह सवाल आम जनता और ग्राहकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या शराब दुकानों में बैठे कुछ कर्मचारी अतिरिक्त मुनाफे के लालच में इस खेल में शामिल हैं? या फिर कोई बड़ा नेटवर्क सरकारी व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर अवैध कारोबार चला रहा है?


प्रशासन मौन, आबकारी विभाग पर सवाल?


सरकारी दुकानों के सामने खुलेआम शराब की कालाबाजारी होने से आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अगर दुकानों के बाहर ही मनमाने दाम पर शराब बिक रही है, तो फिर सरकारी नियंत्रण और नई नीति का उद्देश्य क्या रह गया?


स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कवर्धा शराब दुकान के बाहर चल रहे इस खुले खेल पर तत्काल रोक लगाई जाए, ब्लैक में शराब बेचने वालों पर कार्रवाई हो और जांच कर यह पता लगाया जाए कि आखिर शराब की सप्लाई कहां से हो रही है।


अब देखना होगा कि आबकारी विभाग इस खुले खेल पर लगाम लगाता है या फिर सरकारी दुकान के सामने ही कालाबाजारी यूं ही चलती रहेगी।

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