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कवर्धा में फिर भड़का आस्था का मुद्दा: मूर्ति खंडन मामलों पर हिंदुत्व संगठन सड़कों पर, कार्रवाई पर उठे सवाल।


कवर्धा-जिले में बीते कुछ समय से देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित करने, नुकसान पहुंचाने और धार्मिक प्रतीकों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं ने जिले के धार्मिक और सामाजिक माहौल को फिर से गर्म कर दिया है। अब इस मामले को लेकर हिंदुत्व संगठनों और हिन्दू समाज से जुड़े लोग एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं।


आस्था से जुड़े मामलों पर लगातार हो रही घटनाओं को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ तोड़फोड़ केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि जिले में और गांवों में रहने वाले लाखों हिंदुत्व पर आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं को आहत करने जैसा है। साथ ही सड़कों में उतरे लोगों का आरोप है कि प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इन मामलों में केवल खानापूर्ति कर रहे हैं, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।


कवर्धा में धार्मिक मुद्दों पर यह पहली बार उबाल नहीं आया है। इससे पूर्व विपक्षी पार्टी कांग्रेस के कार्यकाल और कवर्धा विधायक मोहम्मद अकबर के समय 3 अक्टूबर 2021 को लोहार चौक पर हुए धर्मध्वजा विवाद ने जिले की राजनीति और सामाजिक माहौल को झकझोर दिया था। उस समय धर्मध्वजा की रक्षा को लेकर हुए विवाद में दुर्गेश देवांगन पर हमला हुआ था, जिसके बाद जिलेभर में विरोध और न्याय की मांग तेज हुई थी, और इस विवाद का असर इतना बड़ा था कि सत्ता में बैठे लोगों को विपक्ष में बैठने पर मजबूर होना पड़ा।


अब वही चेहरे फिर सक्रिय नजर आ रहे हैं। हिंदुत्व की रक्षा और धार्मिक सम्मान की बात करने वाले लोग इस बार मूर्तियों की सुरक्षा, दोषियों की गिरफ्तारी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।


प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती


कवर्धा जैसे संवेदनशील जिले में लगातार धार्मिक प्रतीकों से जुड़े विवाद प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।


सामाजिक लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों में कानून व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक संवाद भी जरूरी है। धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई और पारदर्शिता ही तनाव कम करने का सबसे प्रभावी रास्ता है।


कवर्धा में मूर्ति खंडन की घटनाएं अब केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं रह गई हैं, बल्कि यह जनभावना, आस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बनते दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई तय करेगी कि मामला शांत होगा या फिर आंदोलन और तेज होगा।

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