इंस्टाग्राम पर 5 रुपये के सिक्के के बदले 85 लाख का लालच… फिर शुरू हुआ ठगी का खेल, कबीरधाम पुलिस ने तेलंगाना में दबोचे दो साइबर ठग

कवर्धा/कबीरधाम- सोशल मीडिया पर दिखने वाला एक छोटा-सा विज्ञापन कभी-कभी आपकी जिंदगी की बड़ी कमाई पर भारी पड़ सकता है। कबीरधाम में साइबर ठगी का ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां 5 रुपये के वैष्णो देवी छाप सिक्के के बदले 85 लाख रुपये और 5 रुपये के ट्रैक्टर छाप पुराने नोट के बदले 1 करोड़ रुपये दिलाने का लालच देकर एक व्यक्ति को साइबर ठगों ने अपने जाल में फंसा लिया।
पहले इंस्टाग्राम पर विज्ञापन दिखा, फिर व्हाट्सऐप पर बातचीत हुई और देखते ही देखते ठगों ने सरकारी शुल्क, जीपीएस रिचार्ज, इंजन वेरिफिकेशन, कस्टम ड्यूटी, बीमा और अन्य फीस के नाम पर पीड़ित से 1 लाख 68 हजार 269 रुपये अलग-अलग खातों और यूपीआई के जरिए ट्रांसफर करा लिए। लेकिन ठगों को शायद यह अंदाजा नहीं था कि जिस डिजिटल नेटवर्क के भरोसे वे लोगों को फंसा रहे हैं, उसी डिजिटल नेटवर्क के सुराग पुलिस को उनके दरवाजे तक पहुंचा देंगे।
इंस्टाग्राम का फर्जी प्रोफाइल और करोड़ों का सपना
मामला अगस्त 2026 का है। पीड़ित इंस्टाग्राम रील्स देख रहा था। इसी दौरान उसकी नजर ऐसे विज्ञापन पर पड़ी, जिसमें पुराने सिक्के और नोट बेचने पर लाखों-करोड़ों रुपये मिलने का दावा किया गया था।

विज्ञापन में दिए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया। सामने वाले ने खुद को मुंबई का रहने वाला बताया। इसके बाद पुराने सिक्के और नोट की तस्वीरें व्हाट्सऐप पर मंगाई गईं।
यहीं से साइबर ठगी का असली खेल शुरू हुआ।
पीड़ित को बताया गया कि उसके पुराने सिक्के और नोट की कीमत करोड़ों रुपये है। रकम प्राप्त करने के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं और शुल्क के नाम पर पैसे जमा करने होंगे।
इसके बाद एक के बाद एक नए बहाने सामने आते गए।
कभी सरकारी शुल्क, कभी जीपीएस रिचार्ज, कभी वेरिफिकेशन, कभी कस्टम ड्यूटी, कभी बीमा तो कभी रसीद के नाम पर पैसे मांगे गए।
पीड़ित हर बार इस उम्मीद में भुगतान करता रहा कि अब करोड़ों रुपये उसके खाते में आने वाले हैं। लेकिन करोड़ों रुपये तो दूर, ठगों की रकम की मांग खत्म ही नहीं हुई। आखिरकार पीड़ित ने अलग-अलग किश्तों में कुल 1,68,269 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जब बैंक खाते और UPI बने पुलिस के लिए सुराग
ठगी की शिकायत साइबर पुलिस थाना कबीरधाम तक पहुंची। मामला सिर्फ मोबाइल नंबर तक सीमित नहीं था। पुलिस ने बैंकिंग ट्रांजेक्शन, यूपीआई, क्यूआर कोड और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया।
जांच आगे बढ़ी तो पैसों की आवाजाही और डिजिटल साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंचने के रास्ते सामने आने लगे।
इसके बाद कबीरधाम साइबर पुलिस ने उमाशंकर राठौर (टीआई)
की अगुवाई में टीम बनाकर पुलिस तेलंगाना पहुंची। जांच के दौरान पुलिस ने निजामाबाद जिले के आरमूर क्षेत्र में आरोपियों की मौजूदगी का पता लगाया।
तेलंगाना में किराये के कमरे से चल रहा था साइबर ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान मोहम्मद नजीम और मोहम्मद रोहिल, निवासी भरतपुर, राजस्थान, के रूप में हुई है। दोनों वर्तमान में तेलंगाना के निजामाबाद जिले के आरमूर क्षेत्र में रह रहे थे।
पुलिस ने फतेहपुर क्षेत्र से दोनों को हिरासत में लिया।
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस के अनुसार आरोपी इंस्टाग्राम पर “राज ज्ञानी” नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर पुराने सिक्के और नोट खरीदने के नाम पर लोगों को भारी रकम मिलने का लालच देते थे।
लालच में फंसे व्यक्ति से पहले उसकी व्यक्तिगत जानकारी और सिक्के-नोट की तस्वीरें ली जाती थीं। इसके बाद भुगतान दिलाने के नाम पर अलग-अलग शुल्क मांगे जाते थे।
यानी करोड़ों रुपये मिलने का सपना दिखाकर पहले छोटी रकम, फिर बड़ी रकम और अंत में लगातार नए शुल्क-यही था ठगी का पूरा जाल।
फर्जी SIM और अलग-अलग बैंक खातों से चल रहा था नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक आरोपियों द्वारा ठगी के लिए फर्जी मोबाइल सिम और अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। रकम अलग-अलग यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड और बैंक खातों में मंगाई जाती थी।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त 5 महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें एप्पल आईफोन, वीवो और रेडमी के मोबाइल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार बरामद संपत्ति की कीमत करीब ढाई लाख रुपये है।
एक पीड़ित नहीं, कई राज्यों में फैला हो सकता है नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों द्वारा अन्य लोगों के साथ दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की ठगी किए जाने की आशंका है। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों के संबंध में भी जांच कर रही है। दोनों आरोपियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार-आपका लालच
इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठगों ने पीड़ित से जबरन पैसे नहीं छीने। उन्होंने सिर्फ एक ऐसा सपना दिखाया, जिसके पीछे पीड़ित खुद पैसे भेजता चला गया।
5 रुपये का सिक्का → 85 लाख रुपये का लालच
5 रुपये का पुराना नोट → 1 करोड़ रुपये का लालच
फिर शुल्क पर शुल्क → और अंत में 1.68 लाख रुपये की ठगी।
साइबर अपराधों में यही तरीका तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है। ठग पहले असाधारण मुनाफे या लाभ का लालच देते हैं और फिर उस लाभ को पाने के नाम पर लगातार पैसे जमा करवाते हैं।
कबीरधाम साइबर पुलिस की अपील-लालच दिखे तो समझिए खतरा है
कबीरधाम साइबर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि इंस्टाग्राम, फेसबुक या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पुराने सिक्के, पुराने नोट, नौकरी, निवेश या किसी वस्तु के बदले असामान्य रूप से बड़ी रकम मिलने वाले विज्ञापनों पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर सरकारी शुल्क, वेरिफिकेशन शुल्क, जीपीएस शुल्क, बीमा, कस्टम ड्यूटी या किसी अन्य बहाने से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर न करें।
अगर कोई व्यक्ति आपको यह कह रहा है कि “पहले पैसे जमा करो, उसके बाद करोड़ों रुपये आपके खाते में आएंगे”, तो यह साइबर ठगी का बड़ा संकेत हो सकता है।
ठगी हो जाए तो इंतजार न करें। तुरंत 1930 पर साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।
याद रखें-साइबर ठगों के पास लालच का नया तरीका हो सकता है, लेकिन आपकी एक सावधानी उनकी पूरी योजना को विफल कर सकती है।





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