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अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने पत्रकारवार्ता में बताया,नियमितिकरण व मालगुजारी जमीन की करेंगे मांग

May 1, 2023
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मुख्यमंत्री डॉ. भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में 3 अप्रैल को होने वाले राज्य स्तरीय सम्मेलन में प्रदेश के 15000 कोटवार शामिल होंगे।


कोटवारों के मानदेय में वृद्धि के लिए आभार प्रदर्शन करने के साथ- साथ कोटवार अपनी ज्वलेत समस्याओं को भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।


नियमितिकरण व मालगुजारी जमीन की करेंगे मांग।


कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने पत्रकारवार्ता में बताया कि दिनांक 3 अप्रैल 2023 को साईंस कॉलेज मैदान रायपुर में प्रदेश के मुख्य मंत्री डॉ. भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में आभार सम्मेलन का आयोजन किया गया है जिसमें प्रदेश के सभी जिला व तहसीलों से लगभग 15000 कोटवार राजधानी पहुंचेगें व सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

संयुक्त कलेक्टर भावगवत जसवाल के द्वारा कोटवारों के संदर्भ में लिखित किताब "कोटवार की प्रथम प्रति को राज्य के मुख्या डॉ. भूपेश बघेल को भेंट करेंगें।

संघ के अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने बताया कि कोटवार विगत कई वर्षों से अपनी नियमितिकरण की मांग को लेकर संघर्षरत हैं परन्तु आज तक कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है, इसलिए आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी कोटवार गुलामी की सी जिन्दगी जीने को गजबूर हैं । पिछले विधान सभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस के घोषणा पत्र में इस बात का उल्लेख है कि यदि कॉंग्रेस की सरकार सत्ता में आती है तो कोटवारों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दे दिया जावेगा, वैसे ही 23 फवरी 2019 में पाटन में आयोजित कोटवारों के प्रांतीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि की आसंदी से मुख्य मंत्री डॉ. भूपेश बघेल ने घोषणा की थी कि, कोटवारों को उनके राजस्व मंत्रीत्व कार्यकाल 2003 में मालगुजारी माफी जमीन का मालिकाना हक दिया गया था और किसी कारण से यदि व छिन लिया गया है तो उसे कोटवारों के हक में वापस कर दिया जावेगा, जो अभी तक नहीं हो पाया ।

हर चुनावी वर्ष में कोटवारों के मानदेय में नाम मात्र की वृद्धि कर कोटवारों को खुश करने का प्रयास किया जाता है इस वर्ष भी मुख्य मंत्री जी ने कोटवारों के मानदेय में वृद्धि करने की घोषणा की है जो ना काफी है परन्तु प्रदेश के कोटवार अभी इस बात को लेकर आस्वश्त हैं कि मुख्यमंत्री कोटवारो की परिस्थिति को भली भांती जानते है और वो कोटवारों के लिये जरूर सहानुभूति पूर्वक विचार कर निर्णय लेंगे ।

"भूपेश है तो भरोसा है" इसी उम्मीद को लेकर कोटवारों ने वगित 4 वर्षों में सरकार के खिलाप कोई आन्दोलन नहीं किया था परन्तु जब धैर्य टूटने लगा तो कोटवारों ने तीन चरणों में मुख्य मंत्री वादा निभाओ धरना प्रदर्शन कर शासन का ध्यान आकर्षित किया।

प्रदेश के कोटवार आज कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं लम्बे समय तक पीढ़ी दर पीढ़ी

सेवा करने के बाद भी कोटवारों का भविष्य अंधरकार मय है । न तो कोटवारों को शासकीय योजनाओं का लाभ मिलता और न पेंशन ग्रेज्यूटी का प्रावधान है और नहीं किसी भी प्रकार के बीमा का लाभ दिया जाता है, नगर पालिका निगम क्षेत्र में कोटवार नियुक्ति में प्रतिबंध लगा दिये जाने से कोटवार का परिवार भूखे मरने की स्थिति में पहुंच चुके है, कोटवारी नियुक्ति में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर हैं इतना सब होने के बावजूद प्रदेश के कोटवार पुरी निष्ठा और इमानदारी से अपने परिवार सहित इस सेवा में जुड़े रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे है ।

कोटवारों को पूरा भरोसा है कि, मुख्य मंत्री कोटवारों के प्रति संवेदनशील है और वो कोटवारों के निम्नलिखित दोनों समस्याओं का निराकरण कर अनुग्रहित करेंगे ।

(1) कोटवारों को नियमित करते हुवे राजस्व विभाग में संविलियन किया जावे।

(2) आजादी के पूर्व से कोटवारों द्वारा धारित मालगुजारी भूमि का भूमिस्वामी हक वापस दिये जाने भू. रा. संहिता में संशोधन किया जावे।

 
 
 

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