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जिस दिन बेटी का जन्मदिन था, उसी दिन पिता ने दी मुखाग्नि -चिल्फी हादसे का सबसे दर्दनाक दृश्य ।

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कवर्धा-बीते दिनों एक बोलेरो वाहन में कान्हा नैशनल पार्क घूमने आए पश्चिम बंगाल के 10 लोगों की कवर्धा जिले के चिल्फी क्षेत्र में दर्दनाक सड़क दुर्घटना हो गई। यह हादसा इतना भयावह था कि बोलेरो में सवार 10 लोगों में से 05 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि बाकी यात्री जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।


इस हादसे ने न जाने कितने घरों में सन्नाटा छोड़ दिया, कितने सपनों को अधूरा कर दिया। लेकिन इस घटना में जो दृश्य सबसे अधिक हृदय को झकझोर देने वाला था, वह एक ऐसे परिवार का था, जहां पत्नी और उसकी 10 वर्षीय मासूम बेटी दोनों ने एक साथ इस दुनिया को अलविदा कह दिया।


वो बेटी, जिसकी हंसी कभी घर की रौनक हुआ करती थी, अब एक तस्वीर बनकर रह गई....और वह माँ, जो अपनी संतान का हर जन्मदिन मनाया करती थी, अब उसी बेटी के साथ चिता की अग्नि में समा गई।


लेकिन सबसे बड़ा दर्द तो उस पिता और पति के हिस्से में आया...

जिस दिन उसे अपनी पत्नी और मासूम बिटिया को अंतिम संस्कार के लिए अग्नि देनी थी.... उसी दिन उस प्यारी बिटिया का 10वां जन्मदिन था। सोचिए...

वह पिता, जो उस दिन अपनी बेटी के जन्मदिन पर घर में केक काटने वाला था, उस पिता को उसी दिन ऐसे स्थान पर केक काटना पड़ा जो दृश्य हर किसी के लिए एक पीड़ादायक रहा और उसके बाद उसे अपनी बेटी और पत्नी को मुखाग्नि देनी पड़ी।

उस पिता ने उस दिन जन्मदिन नहीं, बल्कि अपनों को विदा करने का सबसे दर्दनाक पल जिया...जिस जन्मदिन पर घर खुशियों से गूंजना था, वहां अब सिर्फ सन्नाटा, आंसू और राख का ढेर रह गया।


यह दृश्य इतना मार्मिक था कि जिसने भी सुना, उसकी आंखें नम हो गईं। हर दिल ने बस यही कहा “हे ईश्वर, ऐसा दर्द किसी माता-पिता को कभी न सहना पड़े।”


इस भीषण हादसे में कवर्धा के वे साथी, जिन्होंने इस दुःखी पिता का साथ दिया, अंतिम संस्कार में मदद की और मानवता की मिसाल पेश की उन सभी को मेरा सच्चा प्रणाम।

ऐसे कठिन क्षणों में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म होती है,


रवि ग्वाल/कवर्धा

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